साहित्य

मिट्टी का घड़ा

सुषमा श्रीवास्तव

मिट्टी का घड़ा (मटका) एक प्राकृतिक और पारंपरिक बर्तन है, जो पानी को बिना बिजली के ही ठंडा रखता है। इसके छिद्रों से पानी का वाष्पीकरण होता है, जिससे मटके के अंदर का तापमान कम हो जाता है। यह पानी को ताज़ा और सेहतमंद बनाए रखता है।

•मिट्टी के घड़े के लाभ :-

*प्राकृतिक शीतलन :-

यह पानी को कमरे के तापमान से काफी ठंडा और पीने योग्य रखता है, जो गले के लिए अच्छा होता है।

•पीएच संतुलन:-

*घड़े की मिट्टी क्षारीय (Alkaline) होती है, जो पानी के अम्लीय (Acidic) गुणों को कम करके प्राकृतिक रूप से संतुलित करती है।

*पर्यावरण के अनुकूल (Eco-Friendly): यह पूरी तरह से प्राकृतिक है और उपयोग के बाद मिट्टी में ही मिल जाता है।

•उपयोग करने का सही तरीका

*तैयारी:-

नए घड़े को पहले दिन पूरा पानी भरकर रात भर के लिए छोड़ दें, ताकि मिट्टी पानी सोख ले। अगले दिन उस पानी को फेंक कर घड़ा साफ करें।

*सफाई:-

घड़े को साफ करने के लिए साबुन या डिटर्जेंट का इस्तेमाल न करें। इसे हमेशा सादे पानी और नारियल के रेशे (coir) या हल्के सूती कपड़े से साफ करें।

*पानी बदलना:-

घड़े की ठंडक बनाए रखने के लिए हर 2-3 दिन में इसका पानी बदलते रहें।

 

इस तरह से घड़े में रख कर,ठंडा करके पानी का प्रयोग करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है और विद्युत ऊर्जा की भी बचत होती है।

एक मजे की बात और है कि सर्दी के जाते इस घड़े को भंडारण के लिए उपयोग में लिया जा सकता है या फिर सुंदरता के साथ इसमें कोई छोटा पौधा लगा कर प्रयोग में लाया जा सकता है।

 

 

 

 

लेखिका —

सुषमा श्रीवास्तव, मौलिक सृजन,

रूद्रपुर, ऊधम सिंह नगर, उत्तराखंड।

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