
भैया तुमने देखे बादल,
गरज – गरजकर हमें डराते,
कौंधी बिजली आसमान में,
डर के मारे सब छिप जाते ।
बच्चों ने मिल नाव चलाई,
सुंदर हवा चले पुरवाई ,
झम झमाझम घटा बरसती,
हरति छटा घरती पर छाई ।
भर गए पोखर ताल तलैया,
डूब गई बबलू की मड़ैया,
भरे खेत ,बाग ,घर ,आंगन,
बाढ़ से मच गई ताता थैया ।
सड़कें भरी,वाहन सब डूबे,
खंबे , पेड़ गिरे घर चूबे,
अफरा तफरी हो गई भारी,
डूबे गाँव ज्यों ही पुल टूटे ।
सरोज शर्मा
दिल्ली




