
शैशव से ही कृष्ण की , करती लीला दंग।
माखन चोरी खूब की, ग्वाल बाल के संग।।
ग्वाल बाल के संग, सभी गोपी घर जाते ।
तोड़ें छींका गोप , गिरा के माखन खाते।।
कहे ‘मंजु’ है सत्य, पाठ दे बल का वैभव।
रहें बाल जब स्वस्थ , खिलेगा घर -घर शैशव।।
2
चोरी माखन लाल की , पकड़े गोपी श्याम ।
करे शिकायत मातु से , बाँधा कान्हा शाम।।
बाँधा कान्हा शाम, क्रोध में गोपी बोले।
चलो उसे तुम देख , नहीं अब रस्सा खोले।।
कहे ‘ मंजु’ है सत्य, करे सुत भोजन गोरी।
गिरी देख के दृश्य , लगे है मोहक चोरी।।
3
गोपी सोचे एक दिन , कृष्ण पकड़ तरकीब।
घण्टी उसने बाँध दी , मटकी संग करीब ।।
मटकी संग करीब , कहे है उसको गोरी।
बजना करते कृष्ण , यहाँ पर माखन चोरी।।
बजी बड़ी वह जोर , कृष्ण को पहना टोपी।
पकड़े कान्हा चोर , लक्ष्य पर विजयी गोपी।।
डॉ मंजु गुप्ता
वाशी , नवी मुंबई




