साहित्य

मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

नरसिंगाराम जीनगर

निस्वार्थ रिश्ता निभाता, वह मेरा मित्र है ।

सभी रिश्तों में यह रिश्ता, होता पवित्र है ।।

 

सुख दुख में साथ निभाता, बसे दिल में,

आनन्द उमंग विश्वास का, सच्चा चित्र है ।

 

हृदय को तृप्त करता, सरस स्नेह लुटाता,

अपने जीवन को महकाता, ऐसा इत्र है ।

 

अपनापन अनमोल खजाना, मित्र बिन सूना,

कृष्ण सुदामा की मित्रता जैसा, चरित्र है ।

 

बनके ढाल, संकट काल, खुशहाल रखता,

मित्र बिना नीरसता का अहसास, सर्वत्र है ।

 

मानवता का मीत, निभाए प्रीत गीत मन का,

अपना बल, निजरूप निश्छल, वह मित्र है ।।

 

नरसिंगाराम जीनगर निजरूप

बाड़मेर राजस्थान

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