साहित्य

  • मुक्तक

    राजा हो या रंक सभी, को एक दिन तो जाना होगा। कालचक्र के क्रूर गाल में,इस जहांँ समाना होगा। जन्म…

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  • हाय रे, मेरा पांच साल (हास्य-व्यंग्य)

    नेताजी बोले कि आज गरीब बस्तियों में चलों। वोट का ढेर है। चुटकी बजा दो। वोट का रेला उसकी तरफ…

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  • जीवन का मूल्य

    जीवन ही सृष्टि का आईना है प्रकृति समतुल्य ना किया विचरण है आंतरिक भाव, संताप रहित भय सागर बह जाते…

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  • ग़ज़ल

    होना क्या अंजाम हमेशा तय रहता है। किसका कितना काम हमेशा तया रहता है। आप किसी पर तोहमत कैसे रख…

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  • ग़ज़ल

    कोई शिकवा भी नहीं कोई शिकायत भी नहीं अय मेरे दोस्त कोई तुझसे बगावत भी नहीं अपनी पहचान छुपाये मैं…

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  • दरकती दीवारें

    ​वो जो कभी नींव थी भरोसे की, आज उसमें कुछ दरारें दिखती हैं, बातें जो कभी खत्म नहीं होती थीं,…

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  • आशा की किरण

    आशा की वो प्रथम किरण -जो कल भी जली थी आज भी जली है…, और -कल भी जलेगी…! लेकर आने…

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  • आओ वृक्षारोपण करके

    तपती धरती आज बिलखती, कैसे हम मुस्काऍं। आओ वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचाऍं।। हरियाली का गहना देकर, कोना सभी सजाना। रोपण…

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  • मन मिल जाए भोले में

    ये तन मिट्टी का है भोले, आकर बस जाओ तुम भोले, रीत अनोखी होगी भोले, प्रीत में बंध जाओ तुम…

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  • अकेलापन

    अकेलापन की त्रासदी से अनजान लोगों के लिए अकेलापन एक ऐसी त्रासदी है जो ईश्वर किसी को न दे अक्सर…

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