साहित्य
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कल का दौर
सच बोलने की कीमत बढ़ी, खामोशी सस्ती हुई. हर जुबान बिकाऊ मिली, जमीर की हड्डी टूटी हुई. दुआओं के बाजार…
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आजादी
उन्मुक्त -स्वच्छ आकाश में मेघा करते हैं ,विचरण सदा श्वेत और श्याम रंगों में स्वछंद और मदमस्त हवाओं-संग पंछी भरते…
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छुअन* मालपुआ गुझिया
रंग भरा यह उत्सव पावन,हर्षित बालक वृद्ध सभी जन। गंध सुगंध उड़े घर आँगन,माल पुआ गुझिया खुशबू धन।। रंग बिरंग…
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अपने रंग में कान्हा रंग दो
अपने रंग में कान्हा रंग दो करदो मुझे निहाल। विषय वासना में मैली रहती बहुत हुई बिहाल।। लोभ- मोह माया…
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रक्तिम सूर्य
आता सूरज, जाता सूरज, कहता रहता वो तो हरदम। चाहे सुख-दु:ख की बेला हो एकभाव समभाव रहो तुम। यही नियम…
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बसंत का मौसम बीते न!
बहती हुई हवाओं जाना बासंती देश में जहाँ खिलते गालों पे गुलाब गोरी शरमाए बासंती वेश में! जहाँ खिलते गेंदा,…
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विविक्ता में न होते तुम..
कितने विशाल कितने हो सुन्दर व्यापकता के उदाहरण हो समंदर कभी उल्लसित तो कभी हो शांत अमर्ष कभी तो कभी…
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बुझा दो शमां
बुझा दो शमां वो आए हम लाजवाब हो गए महफिल में मेरी रौनक ए महताब हो गए रूह में उतर…
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डॉ नवनीता दुबे नूपुर को नेपाल की राजधानी काठमांडू में मिली मातृभाषा रत्न मानद उपाधि
मंडला शहर की शिक्षिका एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ नवनीता दुबे नूपुर को नेपाल की राजधानी काठमांडू में शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय…
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लघु कथा राम,रहीम मैत्री
रोज़ की तरह पोतों को लेकर धूमने निकल गया और प्रतिदिन की तरह समीप बने मां के मंदिर मे ले…
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