साहित्य
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ग़ज़ल
भटकती ज़िन्दगी से वास्ता था मेरा भी तिश्नगी से वास्ता था। फ़कत चेहरे मुझे लगते सियासी, उन्हें बस बंदगी से…
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कुलदीप सिंह रुहेला
मेरी हिंदी को भी समझो ज़रा, ओ अंग्रेज़ी वालो, ये मेरी मातृभाषा है, दिल की उजली लालो। तुम सूट-बूट में…
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बाधाएं-अड़चनें
भाग्य में जो लिखे प्रभु हैं, वही आता सबके सामने। कठिनाइयों के डर से भाई,कदापि लगें मत भागने।। बड़ी परीक्षा…
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गज़ल
बहुत कोशिशें की हॅंसाना नही है। किसी को अकारण सताना नहीं है।। — तुम्हारे मिलन की हरीच्छा अधूरी, मुहब्बत मुझे…
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आओ चलें, भगोरिया मनाएँ
जब बसंत पहाड़ियों पर धीरे से झुकता है, भगोरिया मिट्टी से रंग बनकर उठता है। पेड़ों से पहले गलियाँ खिल…
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अगर तुम साथ हो
जुबां पर है बस एक बात, अगर तुम साथ हो तो फिर चिंता की क्या होगी बात! निर्द्वन्द्व, निर्भीक, बहती…
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राम मंदिर की संघर्ष यात्रा
भव्य मंदिर श्री राम का हो, इसी हेतु संघर्ष किए हैं। सदियों से ही अनगिन हिंदू, प्राणों का बलिदान दिए…
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सुमन बिष्ट
सुख,इंद्रधनुष-सा क्षणिक है, जैसे नभ में आती जाती छाया, शांति,धरा की गोद में पले, जिसने मन में घर बनाया। सुख,…
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श्याम रंग में रंगी राधिका
जब फागुन रंग छमकते हों, तो देख बहारें होली की, जब बाजारों में रौनक हो, तब देख बहारें होली की।…
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फिर आया है फागुन
चारों तरफ़ खिले फ़ूल पलाश के सरसों की भीनी सुगंध फैली हवा में फागुन के स्वागत में प्रकृति ने किया…
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