साहित्य
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पैग़ाम
मोहब्बत में ऐसे भी मक़ाम आए कि मेरी मौत हो और तुम इल्ज़ाम आए!! नफ़रतों का शहर है जरा बचके…
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अधूरी कथा का वीर
जब मातृगर्भ निद्रा में था, रण-मंत्रों का गान सुना, चक्रव्यूह प्रवेश विधा का, आधा केवल ज्ञान सुना। भाग्य बीच में…
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माटी का कर्ज…हमारा फ़र्ज
हे मातृभूमि तेरी ये माटी ! साए में जिंदगी है काटी फ़र्ज बड़ा हमें निभाना है कर्ज उतारें मृदामाते रानी…
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प्रकृति ही, ईश्वर है
पर्यावरण दिवस पर सम्पूर्ण विश्व धरा की महत्वपूर्ण भूमिका को, सतत् प्रणाम करता हूं पर्यावरण है तो जीवन है, यह…
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वक़्त की पुकार
पर्यावरण आज करे गुहार मत करो उस पर अत्याचार जल, थल , अग्नि, वायु, आकाश पंचतत्वों का न करो व्यर्थ…
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ऐ धरा मातृभूमि मेरी
कितना दर्द ऐ धरा ,छुपा के रखतीं हैं तू कितनी पीड़ा सहती है संसार के लिए तू न कभी सोचा…
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धरती ने आज पुकारा
धरती ने आज पुकारा धीमे स्वर में, “मत छीनो मुझसे ये हरियाली अमर में।” सूखती नदियों की आँखें कहती कहानी,…
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बढ़ता तापमान,हो रहा पर्यावरण नुकसान
1 नदी ताल में कम हो रहा जल हम पानी यूँ ही बहा रहे हैं। ग्लेशियर पिघल रहेऔर समुन्द्र तल…
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पर्यावरण
विश्व पृथ्वी दिवस पर विशेष 🙏🙏🌎🙏🙏 “देख त्रास ” वसुन्धरा बोली-: निर्वस्त्र सा कर, आनंदित होते हो?? साक्षात मृत्यु सामने…
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प्रकृति का क्रंदन
नीले अंबर, शीतल धारा, जीवन का यह मूल है, मानव की नादानी से, कुदरत आज धूल है। कंक्रीट के इन…
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