साहित्य
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अकेलापन
अच्छा लगता है, महीने के अंतिम दिनों में अकेले बैठकर, अपने बीते हुए पलों को याद करना … कभी-कभी बीते…
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लघुकथा- अक्षय मोती
” माँ! मैं बर्बाद हो गई। सब खत्म हो गया माँ!” तीन दिन से अस्पताल में बेहोश पड़ी आरती को…
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संघर्ष और श्रम
प्रातः काल जब हम उड़ते हैं। नई उम्मीद नई सोच नई ऊर्जा के साथ। अपने खून पसीने से सींचते हैं।…
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दीदार
साहिल की रेत पे बैठा हूँ मैं अकेला करता हूँ तेरी बेसब्री से इन्तजार हल्की धुंधली कुहासा उतर …
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गौरैया
घर-आँगन,चौबारे बगिया, ढूँढ रही आज छाँव गौरैया। दानापानी का सकोरा देखे, पंख पसारे नीचे को आए। दाना चुगती, पानी…
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जयहिन्द कर्नल साहब
मन के हारे हार है, मन के जीते जीत, कहे कबीर हरि पाइए, मन ही की परतीत। जब एक चिकित्सक…
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ये अलार्म।न होता तो क्या होता : एक मार्मिक कविता
ये अलार्म न होता क्या हम सुबह उठ पाते, नींद के मीठे सपनों में ही दिन को बिताते। न काम…
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गुल्लक
घर घर में होता गुल्लक बच्चों केलिए मनी बॉक्स कुछ बॉक्स मिट्टी से बने हैं वे विभिन्न रंग रूप होते…
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दोहे जगदीश के
वचन नहीं कटु बोलिए, मधु सम वाणी राज। और जगत के सामने, हो मीठी आवाज।। कहते सच जगदीश हैं, जरा…
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भगवान परशुराम जयंती
परशुराम भगवान का, जन्मोत्सव है आज, अक्षय तृतीया पुण्य तिथि, शुभ होते सब काज। शुभ होते सब काज, न बाधा…
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