साहित्य
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बुढ़ापे की लाठी
बेटे बहू के जाते ही ओम प्रकाश जी ने रुंधे गले से कहा देख रही हो रुक्मणि हमने जहां से…
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पियो मुस्कान संग बाल कविता
दूध सफेद सुधा सा अमृत, तन-मन का हितकारी है। हर कमजोरी दूर भगाए, दूध बड़ा भंडारी है।। कैल्शियम से काया…
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भगोरिया की मस्ती में वह भिलालन
भगोरिया पर्व पर दस्तक देती वह भिलालन मस्ती उमंग ओर उन्मुक्तता का अहसास कराती हुई प्रसन्न हो जीने का अद्भुत…
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मौसम ने किया शृंगार
चलती है मस्त बयार फागुन आया है। मौसम ने किया शृंगार फागुन आया है।। सरसों हंसी खेतों में पीत चुनरिया…
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अजनबी
आज क्यों आंँख में नमी सी है लगता है जैसे चांँदनी धूली सी है!! बहुत दिनों से तेरा इंतिज़ार था…
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अपने भईल गैर
भोजपुरिया आदमी होके , भोजपुरिए से भईल बैर । कईसे समझीं हम आपन , जब अपने हो गईल गैर ।।…
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कर्तव्यबोध स्वभाव सरल होता है
धर्म के अनुसार सदाचरण हो, ऐसे पुरुषार्थ से अर्जित धन हो, ऐसे धन से यज्ञ किया गया है, तो यज्ञ…
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मजेदार पैग
कई बार मना किया गया मत पियो शराब सुनता कौन है आधी रात तक एक चटकारेदार मजेदार पैग हलक के…
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यमराज मित्र के दोहे
मन में यदि संशय जगे, करें नहीं वो काम। अच्छा होगा मानिए, तव करना विश्राम।। अहित किसी का हो रहा,…
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पनप रही हैं धीरे-धीरे, बेलें भ्रष्टाचारी
गीत-पनप रही हैं धीरे-धीरे, बेलें भ्रष्टाचारी पनप रही हैं धीरे-धीरे, बेलें भ्रष्टाचारी। पर्दे के पीछे जो कुत्सित, हैं समक्ष संस्कारी।।…
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