साहित्य

  • खुद की दौड़

    मैं अपनी चाल से चलूँ, किसी की परछाईं क्यों बनूँ, मेरी धड़कन की अपनी लय है, मैं दूसरों की ताल…

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  • अक्ल बड़ी या भैंस – लोकोक्ति

    पोते ने पूछा दादा जी , हम यह सुनते रहते, अक्ल बड़ी या भैंस बड़ी है ऐसा सब हैं कहते।…

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  • धड़कन

    दिल की धड़कन ही तो है जो नित सारे एहसास कराती है, जीवन जीने का पल-पल एहसास जगाती है। नित्य…

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  • जीवन -साथी

    वो रात खुशियों भरी सौगात थी जब.., मन के अंतस में दीप जले , और मिला साथ तुम्हारा मुझे जीवन-साथी…

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  • कव्वाली खाटू मोहन

    खाटू मोहन ने क्या शान अजब पाई है हाँ पाई है । प्यारे मोहन ने क्या शान अजब पाई है…

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  • ग़ज़ल

    कभी  कभी  जरा सी हमने  मयक़शी  कर ली। इसी  तरह  ग़मों  से  थोड़ी   दोस्ती   कर   ली। चले ही जाते शब-ओ-रोज …

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  • खतरे में है आत्मसम्मान

    निकल चलो   अब इस बस्ती से बेईमानों की बदनाम    कश्ती से शर्मसार हो गया है   मान सम्मान अब ना…

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  • ग़ज़ल

    किसी को गले से लगा कर तो देखो। कभी पास में तुम बिठा कर तो देखो। महक तब उठेगा जिगर…

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  • निश्चल प्रेम

    (एक सखी दूसरी सखी से कह रही है) हे सखी मैं चाहती हूँ मेरा प्रेम निश्चल हो कोई आवेश न…

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  • गीता में आत्मा

    श्रीमद्भगवद् गीता एक विलक्षण ग्रंथ, स्वयं ईश्वर की दिव्य वाणी है यह। गीता ज्ञान ही गूढ़ ज्ञान कहलाया। ज्ञान उपदेश…

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