साहित्य
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प्यार और दयालुता
प्यार एक एहसास होता जहाँ ममता है, प्यार दया करुणा है जहाँ पर समता है। माँ के जैसे प्यार दया…
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वीर शिवा जी
बबर्र शेर थे वीर शिवा जी , भगवा ध्वज थी शान । हमारा भारत देश महान ।। उन्नीस फरवरी सोलह…
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अंत भला तो सब भला – लोकोक्ति
दादा जी ऐसा क्यों कहते , अंत भला तो सब भला? पर मुझको यह समझ न आया सब जग इस…
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वीर छत्रपति शिवाजी
वीर छत्रपति शिवाजी साहस की ज्वाला बनकर, जो रण में आगे आए, धर्म, स्वाभिमान बचाने को, जीवन भर लड़ते जाएँ।…
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इंतजार
करती हूँ आज भी इंतजार तुम्हारा…! शिद्धत से, खड़ी खड़ी चौखट पे, इन सूनी सूनी आँखों से, कि…., तुम आओगे…
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मेरे छत्रपति, मेरे देश की शान
मेरे छत्रपति, मेरे देश की शान, यही मेरा और देश का अभिमान। सिंह-सी दहाड़ लिए रण में उतरे, मातृभूमि के…
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ये चुप्पी ठीक नहीं
वो भी आती नहीं, हम भी बुलाते नहीं! यूँ ही रूठने से घर बसाते नहीं!! वो कहती नहीं, हम जताते…
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बुढ़ापे का अकेलापन
तुम्हारे नन्हे हाथों की छुवन याद करते हुए मैं अपना बुढ़ापा संवार लेता हूँ ख़ुद को झूठी तसल्ली देकर मना…
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जीवन रंगमंच का अभिनय
मन के अंदर संघर्ष-द्वन्द्व पर चेहरे पर छायी रहती है मुस्कान मधुर, जीवन जीने का सरल सहज पथ, जीवन रंगमंच…
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परीक्षा
जीवन में हर रोज ही, क़दम – क़दम पर प्रश्न। कोई बिन उत्तर लिखे,मना रहा है जश्न।। मना रहा है…
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