साहित्य

  • भावनाओं को समझ ले जो

    भावनाओं को समझ ले जो इंसान वह सबसे पढ़ा लिखा इंसान होता है, वह इंसान फिर चाहे अति विद्वान हो…

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  • ग़ज़ल : माँ-बाप दोबारा नहीं मिलते

    माँ-बाप ज़िंदगी के वो अनमोल ख़ज़ाने हैं, बिछड़ जाएँ एक बार तो दोबारा नहीं मिलते। उम्र भर जहाँ में रिश्ते…

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  • शिव और सती

    -शिव और सती भोले के तन भर्ती भस्मी,गले सर्पों का हार है। सुनता जग की महकाल ,सबका दातासतीर है।। पहने…

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  • जन्म जन्मांतरों का संगम

    जन्म जन्मांतरों का संगम जन्म–जन्मांतरों का संगम, आत्माओं का मीत पुराना, समय की धारा में बहता, अपना पावन सा अफसाना।…

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  • आखिर आजकल पढ़ता कौन है

    आख़िर आजकल पढ़ता कौन है, सब अपनी धुन में गाते हैं, शब्दों के मेले में लेकिन, अर्थ कहाँ सभी रह…

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  • मानस मन्थन

    किया न जिसने आजतक,मानस का रसपान। भले चतुर बनता फिरे,मूढ़ मंदमति जान।। मूढ़ मंदमति जान,कटे सारे भव बंधन। जानहु तब…

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  • इष्ट देव

    जग पालक श्री श्याम, धरूं मैं ध्यान आपका । तू ही कृपालु दाता है, तू ही दया निधान है ।।…

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  • फागुन आ धमका

    अधरों पर गीत सजे जबहीं, समझो तब फागुन आ धमका। मन के अँगना सुरताल बजे, तब ताल तरंगित हो चमका॥…

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  • बे-क़रार

    ख़्वाब में आना भी नहीं मुमकिन वक्त ही नहीं है मेरे महबूब के पास!! सिकुड़ता जा रहा है रिश्तो का…

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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल जब बढ़ी दुश्वारियां तो ज़िन्दगी खतरे में है। इस विषैले दौर में तो ज़िन्दगी खतरे में है। फूल की…

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