साहित्य
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कविता
बिन करुणा के मानुष केवल माटी की एक काया है, जिसने प्रेम न बांटा जग में उसने सब कुछ गंवाया…
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पुरुष का हुकुम (व्यंग्यात्मक कविता)
अच्छा करने वाला पुरुष ठीक ढंग से कपड़े नहीं साफ कर सकता है ठीक से रोटियां नहीं बना सकता है…
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शिवरात्रि
चले भक्त शिवरात्रि में, शिव गौरा के द्वार। बम -बम भोले बोलकर, जीवन लेते तार।। दूर-दूर से चलकर आते। भोले…
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गज़ल
जब हम उठते हैं तुम्हारा ध्यान करते हैं। बातो पर तेरी सदा अभिमान करते हैं।। मेरे दिल में धड़कता है…
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शिव-स्तुति
नंदी की सवारी करें, कैलाश पर विराजें हैं, गंग जटा धारी हैं, मृग छाला वसनधारी हैं, शिव जग में अवतारी…
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आस्तीन का सांप – मुहावरा
पोते ने दादा से पूछा, दादा बात बताएं, आस्तीन में सांप यहाँ पर पाले कैसे जाएं? दादा बोले मित्र बनाकर…
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शिव महिमा
हे कैलाशपति करुणामय, तुम्हारी महिमा अपरंपार, भव-सागर से तारो हमको, करा दो मेरा बेड़ा पार। पी कर विष तुम नीलकंठ,…
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महाशिवरात्रि त्योहार आ गया
आज तो कैलाश सज गया ओ कैलाश सज गया देखते ही देखते ही नंदीश्वर सज गया ओ नंदीश्वर सज गया…
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भजन भक्तों झूम कर नाचो
भोले बाबा की आई है बारात आज है महाशिवरात्रि की रात कि भक्तों झूम कर नाचो….. भोलेनाथ ने किया श्रंगार…
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भावनाओं को समझ ले जो
भावनाओं को समझ ले जो इंसान वह सबसे पढ़ा लिखा इंसान होता है, वह इंसान फिर चाहे अति विद्वान हो…
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