साहित्य
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शब्दों कीमर्यादा(दोहा)
शब्दों कीमर्यादा(दोहा मर्यादा नित राखिये, करना है सम्मान। आदर सब को दीजिये, बनती है पहचान।। मर्यादा रखभाव का, बोल दिये…
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मौन- आख़िर कब तक
समझदारी की कीमत अक्सर, सबसे अधिक चुकानी होती है, जो चुप रहकर सब सह लेता है, उसकी सारी पीड़ा बेमानी…
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मेरे एहसास
क्या खुशनुमा लम्हें थे वो जब तुमने सफर में साथ लिया था हमें अब क्या तुम छोड़ आ पाओगे वहां…
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देश की मिट्टी
लगे देश की मिट्टी प्यारी, महिमा बड़ी अपार। चंदन बनकर महक रही है,हरपल इस संसार।। इसकी रक्षा हर पल करना,…
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शस्त्र-शास्त्र का उद्घोष
कलम हमारा हथियार रही, संगीनों में भी धार रही, मंगल पांडे से आज़ाद तक, विरासत हमने कही। चाणक्य सी अद्भुत…
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(no title)
खामोशियों की चादर हटकर, चलो कुछ बात करते हैं, सपनों के किसी कोने में, फिर मुलाकात करते हैं। दिल के…
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पूर्णिका-गणतंत्र के साये में
गणतंत्र सदा अपने जीवन में मनाते रहेंगे। जीवन अधूरा कर गये नाम हम गाते रहेंगे।। वीर था सपूत वह माँ…
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हंसी ठहाके गुम अब रिवाज है झूठी मुस्कान का
********** हंसी ठहाके गुम अब रिवाज है झूठी मुस्कान का। स्वार्थी रिश्ते आदमी निभाता देख नफा-नुकसान का।। ********* निस्वार्थ निश्चल…
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नाहक बहक रहे
पक्षी तक गणतंत्र दिवस पर नभ में चहक रहे। स्वार्थ के वशीभूत कई खग नाहक बहक रहे। पेड़ों पर बैठी…
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