साहित्य

  • बाल कविता प्रखर

    शौर्य नाम दिया है तुमको कुल को रोशन तुम करना। लोहे से सीख के तपना खुद में ताकत भर लेना।…

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  • कर्म, चेतना और आंतरिक स्वतंत्रता

    जीवन का सबसे बड़ा और सच्चा संदेश यह है कि हमें इस संसार में रहते हुए भी उससे चिपकना नहीं…

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  • बसंत पंचमी

    पीली धूप ने आज धरती की हथेली पर सरसों-सी हँसी रख दी है। हवा के कंधों पर बैठ कोयल ने…

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  • स्वागत बसन्त

    इमली पे आईं शोखियाँ,बसन्त आ गया झाड़ी में पकी बेरियांँ , बसन्त आ गया इमली……. वो लाल-लाल कोंपल,आमों पे आगयीं…

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  • सुंदरता

    सुंदरता तन की या मन की, यह प्रश्न बार-बार आता है। सुंदरता जिसने देखी तन में, वह उलझन में फंस…

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  • यमराज और यमराज मित्र की बधाइयाँ

    नववर्ष हास्य -हंगामा मेरे प्यारे बड़े बुजुर्गों, छोटे-बड़े भाइयों, भाभियों, बहनों- बहनोइयों और शुभ-अशुभचिंतक मित्रों यथोचित प्रणाम, नमस्कार, नववर्ष 2026…

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  • माँ सरस्वती

    कमल दल पर आसीन शारदे, श्वेत प्रभा मुस्कान भरी । हंस संग करती पथ-निर्देशन, जग में ज्ञान प्रकाश धरी। शुभ्र…

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  • बसंत पंचमी : चेतना का पर्व

    पीली धूप, पीले सपने, धरती ने मुस्कान ओढ़ी। शीत विदा ले चुपचाप गया, नव ऋतु ने आशा जोड़ी॥ सरसों हँसी…

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  • बसंत पंचमी

    पीली चुनरिया ओढ़े धरा, मुस्काए अम्बर आज जरा। कोयल ने छेड़ा मधुर राग, फूलों में जागा नया साज वीणा में…

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  • ग़ज़ल

    मिले आकाश सा विस्तार जब पावन मोहब्बत को, नजर में अक्श मिलता है सलोनी सी हकीकत को। जहां दो दिल…

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