साहित्य

  • क्रोध

    क्रोध है एक अद्भुत भावना जो होती आसक्ति से उत्पन्न भय भी हो सकता है कारण न रहने दे क्षणभर…

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  • जनक नंदिनी (झूला-गीत)

    झूला झूले जनक दुलारी, सीता मैया प्यारी-प्यारी। धरती माँ की कोख से आई, जग में फैली उजियारी। जनक राजा गोद…

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  • ग़ज़ल

    समझो दुनिया एक सराय आने वाला आता है और जाने वाला जाय.. दुनिया को कहते हैं फानी फितरत इसकी आनी…

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  • भाव शून्य

    शादियां भव्य हो गई है। रिश्ते शून्य हो गए हैं कैसा यह समय आया घर आंगन सब सूने हो गए…

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  • शाम का आवरण

    सुनहरी रोशनी फीकी पड़ने लगती है, एक शांतिपूर्ण सन्नाटा सूरज को ढंकती है। बादल करीब आते हैं एक गहरा साया…

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  • कौन हूँ मै

    कोई अगर जो पूछे मुझसे कौन हूँ मै, तो हंसकर बोल देती मोम सी दिखती पर पत्थर हूँ मै, कह…

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  • स्वागत बसन्त

    इमली पे आईं शोखियाँ,बसन्त आ गया झाड़ी में पकी बेरियांँ , बसन्त आ गया इमली……. वो लाल-लाल कोंपल,आमों पे आगयीं…

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  • भजन

    भगवन जी कृपा ये कर दो,जीवन में बस उमंग ही हो। अधरों पर हो नाम तुम्हारा, सेवा, सुमिरन, सत्संग हो॥…

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  • भोले संग चलूंगा

    मैं तो भोले संग चलूंगा, कदम-कदम हर रंग भरूंगा, जीवन की चलती गाड़ी में, मुस्कानों के रंग भरूंगा। मैं तो…

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  • सरस्वती वंदना सरसी छंद

    मनभावन छवि मातु तुम्हारी, करती जग उँजियार। झंकृत कर दो अंतरमन माँ, वीणा की झंकार।। वेद पुराणों की हो ज्ञाता,…

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