साहित्य
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कोहरे की मार
कोहरे की मार बहुत, पेड मुरझे तमाम। शीत भंयकर हो रही, हुआ न कोई काम।। छुपा बादलों में शहर,…
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बेसहारा
जिसने मुझे था जीवन दिया जिसने मुझे था रोशन किया वो अभागा मैं बन गया जिसने बुझाया वो रोशन दिया…
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सभ्यता की टूटी हुई सीमा रेखाएँ
कुछ देर पहले मैंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो देखा। एक ट्रेन के डिब्बे में, सार्वजनिक सीट पर, एक…
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नया वर्ष, नई उम्मीद
नया वर्ष आया है, नई उम्मीद लाया है, पहाड़ों की चोटियों पर, बर्फ़ का नूर छाया है। सैलानियों के…
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मुबारक साल नया
हिम से ऊंची आशाओं का, मीठी बोली भाषाओं का। मन में आए अरमानों का, आज बिछाया जाल मुबारक साल नया।।…
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सावित्री का जन्म मनायें
सावित्री का जन्म मनायें l उनकी शिक्षा को अपनायें ll जन्म कृषक के घर में पाकर, उन सी कुछ…
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अधूरी तलाश
तेरे दीदार की मेरे अक्स को तलाश है, आईने में भी अब चेहरा मेरा बे-लिबास है। तू पास नहीं…
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आ गई जनवरी
बीत गया दिसंबर आ गई जनवरी। ओढ कर धुंध और कोहरे की चुनरी। कैसे करे हम नए साल का स्वागत।…
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प्रतिदिन हजारों द्वारा पढ़ा और सुना जाता डॉ राम शंकर चंचल झाबुआ
मध्यप्रदेश के आदिवासी पिछड़े अंचल झाबुआ मैं जन्म हुआ डॉ राम शंकर चंचल आज सम्पूर्ण देश विश्व मैं सार्थक…
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खुशियाँ
ऐ ज़िन्दगी के मुसाफ़िर! सुन ले, ज़रा रुक जा। ग़म को दरकिनार कर, खुशियों का आगाज़ कर। हर रंजो ग़म…
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