साहित्य
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जब धरती पुकारती है
वसुधैव कुटुम्बकम्’ कहने वाला देश आज अपनी ही धरती को बीमार देख रहा है। नदियाँ काली हो रही हैं, हवा…
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जबलपुर
विगत दिवस छह जून को प्रसार भारती आकाशवाणी के गौरवशाली 90वर्ष को समर्पित हिंदी काव्य और उर्दू शायरी का एक…
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दफ्तर और देहरी
दफ्तर और देहरी के बीच संतुलन, बनाना नारी को अच्छे से आता है। तभी तो देहरी में ढेर सारा प्यार,…
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दादा-दादी
दादा – दादी आए हैं, ढेरों खिलौने हैं लाए। बैग से उनके निकल रहे हैं, लड्डू,मठरी और मिठाई, जिसकी ख़ुशबू…
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अंधेर नगरी,चौपट राजा
1.)आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे हुये सिस्टम में मेहनत, प्रतिभा, कानून ,और योग्यता के बल पर सफलता प्राप्त करने का प्रयास…
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लघु कथा : डाकघर
गाँव के बीचों-बीच एक छोटा-सा डाकघर था। वहाँ के डाकिया रामलाल अपने समय और ईमानदारी के लिए प्रसिद्ध थे। एक…
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गर्मी की छुट्टियां
गर्मी की अब छुट्टियां आई। खुशियां बच्चों के मन में लाई। पेड़ पर चढ़कर आम अमरूद हम तोड़े। आंगन में…
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रे मज़दूर- जानों अब तुम अपने सारे हक
अनजान न रहो अपनी सुविधाओं से, जानों अब तुम अपने सारे हक। इसका गर करोगे सदुपयोग, तुम समृद्ध होंगे अब…
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गुण दोष
गुण केवल अपने ही दिखते हैं, ज्यादा दोष परायों के दिखते हैं। गुण – दोष बराबर होते दोनों में, हम…
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बुजुर्ग पिता की ताकत–लघुकथा
रमन अपने पिता से दुखी है। अब उसके पिता अस्सी के पार हो गयें हैं। पिता की देखभाल करने में…
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