साहित्य

  • सीख जाते हैं 

    जो ख़ुद गिरकर संभल जाते हैं अक़्सर, वो ज़माने को उठाना सीख जाते हैं। जिन्होंने झेली हो धूप रास्तों की,…

    Read More »
  • प्रेस विज्ञप्ति*

    *प्रेस विज्ञप्ति* *झांसी \ फिल्लौरी जी ने ॐ जय जगदीश हरे आरती को हर घर हर मंदिर में पहुँचाने का…

    Read More »
  • गरीबों की आह

    कुकर्म तुम्हें कभी ना बचा पायेगा नरक की कोठरी  तक ले जायेगा लाख करो तुम दिखावे  की हवन मंदिर में…

    Read More »
  • जीवन की मैराथन

    बिस्तर से उठकर मैंने चलने की कोशिश की, पर चल नहीं पाई। ठंडी साँस लेकर फिर लेट गई। अब तो…

    Read More »
  • बरस रहे नभ से अंगारे

    तप्त हुआ दिनकर अतिशय अब, जीव-जन्तु लाचार। बरस रहे नभ से अंगारे, चहुँदिश हाहाकार।।   ज्येष्ठ मास की तप्त दुपहरी,…

    Read More »
  • ग़ज़ल

    जिन पर हम जान लुटा कर बैठ गए वो तो हमसे आंँख चुरा कर बैठ गए।   दुश्मन जितना उड़ाना…

    Read More »
  • अनकहा सत्य

    क्या सचमुच हर हँसी के पीछे उजियारा ही बसता है, या भीतरी अँधियारा भी अधरों पर दीपक धरता है।  …

    Read More »
  • गीत सृजन  मुखड़ा

    तपती धरती बाट निहारे, घिर आओ घनश्याम। सूने नभ में आस जगी है, लेकर तेरा नाम॥   खेत बाग वन…

    Read More »
  • रिश्तो के बदलते रंग

    मौसम की तरह बदल है जाते, हमारे अपने रिश्तों के भी रंग। कभी तो कारवां चलता साथ हमारे, कभी कोई…

    Read More »
  • क्या सचमुच?

    क्या सचमुच वेदों-पुराणों का वो सार आज भी है? जो सुना बुजुर्गों से, क्या वो चमत्कार आज भी है? अनंत…

    Read More »
Back to top button
error: Content is protected !!