साहित्य
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दहेज प्रथा
मानव जीवन संघर्षमय बनता है हर कुटुंब में दहेज एक समस्या है विवाह के समय धन दौलत देता है इसे…
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एक पौधा माँ के नाम
चलो एक पौधा माँ के नाम लगाते हैं, उसकी देखभाल माँ जैसी करते हैं। नियमित जल-सिंचन से तृप्त रखते हैं,…
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अग्नि में अस्तित्व
लपटों के बीच खड़ी एक परछाई, दोनों हाथ उठे, जैसे दुआ या दुहाई। नारंगी शोलों का समंदर उबलता, पर वो…
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समयचक्र का फेर
दुख कहने से नीक है,उदय साधिये मौन। ढलते सूरज को भला,अर्घ्य चढ़ाता कौन।। अर्घ्य चढ़ाता कौन,समय है सब पर भारी।…
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सपने स्वेटर की तरह होतें हैं
वह एक ऊन का गोला है, अधूरी इच्छाओं का, जिसे समय की सिलाइयों पर हम रात-भर बुनते हैं। एक फंदा…
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जलधार की छाया
धधक रही भू की देहरी, रवि बरसाए अंगारे। ऐसे में तरु-छाया लगती, जैसे सुख के द्वारे।। पीपल की दृढ़…
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पति धर्म
कठिन धूप है,पांव जल रहे ,कैसे पति को गंगा नहलाऊं, जिद है जाएंगे पैदल ही,मां कैसे तुमको ला पाऊं,…
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गुरु वंदना
मेरी कुटिया में गुरु जी आज आयेंगे, मेरे सोए हुए भाग्य भी जग जायेंगे। धूल भरे आँगन में दीपक…
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तप्त समय का सत्य
जलते सूरज की चिंगारी अब केवल मौसम में नहीं है, मनुष्य के भीतर फैली अतृप्त इच्छाओं की गर्मी है। …
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