साहित्य
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चन्द्रशेखर आज़ाद
साक्षी है बलिदान की, धरती प्रयागराज। जहाँ गूँजी थी गोलियाँ, अमर हुए आज़ाद।। भाभरा की पावन धरा, जनमा सिंह-स्वरूप। माँ…
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गज़ल :- कहां चले गए मां-पापा, यूं मुंह मोड़कर
सभी को लगाया रंग, सिर्फ तुम्हें छोड़कर, कहाँ चले गए माँ-पापा, यूँ मुँह मोड़कर।। सूना पड़ा आँगन है, चौखट भी…
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समाज सेवा का फल–हास्य-व्यंग्य
मुर्गा सोते लोगों को जगाता है। जब सब गहन निद्रा में सोने का प्रयास करते हैं। वह बेचारा अपनी नींद…
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ये कामयाबी के इरादे
जीवन में कुछ करना है तो कामयाबी हासिल करनी है, रुकना नहीं है राहों में यारो बस आगे ही बढ़ते…
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विश्व महिला दिवस पर दस्तक देती विशेष कविता
ऊँची, ऊंची, हाथी देह सी, पहाड़ियाँ रात का धनधौर अँधेरा और वह मासूम भूख से बिलखता मां की गोद में…
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बचपन का मौसम
फिर न लौटेगा कभी मौसम सुहाना यह। फिर न झूमेगा सरल बचपन दिवाना यह।। याद आयेंगे मधुर दिन वो सुहाने…
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नगर के डगर में
नगर के डगर में , जहाॅं जहाॅं ठाॅंव बा । एने ओने घूम देखीं , उहें बसत गाॅंव बा ।।…
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प्रेम की रोली
रंग सभी जन खेल रहे मिल के वृषभानु लगा मन कृष्णा। प्रीत रही मन में मन मीत बना तब छोड़…
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रंग भरी एकादशी
फागुन की मधुमास हवा में, छाई नव उजियारी, रंग भरी एकादशी आई, लेकर छवि प्यारी। गुलाल उड़े गलियों-आँगन, महके हर…
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बिन बुलाए मेहमान… हास्य-व्यंग्य
मखंचूलाल खाने के बहुत शौकीन थे। शहर में होने वाले शादी समारोह में बिन बुलाये पहुँच जाते और खूब कचर-कचर…
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