साहित्य
-
ये देखना है माना जबसे तुमको अपना
माना जबसे तुमको अपना । अब काहे का दुख में तपना ।। दूर हुए हैं दुख अब सारे । अब…
Read More » -
होली की हार्दिक शुभ कामनाएं!
जी रया, जागि रया, बचि रया, इन दिन मासौं कें तम भेटने रया। दुब कि जै परि तुम फैल जया,…
Read More » -
पतझड़
(१) पीत वसन धर वृक्ष खड़े, सूनी हर इक डार, झरते पात सुनाते हैं, जीवन का व्यवहार। आज हरे जो…
Read More » -
मजमा
चेहरा छुपा रही है हमसे ज़िन्दगी क्या-क्या दिखा रही है हमें ज़िन्दगी!! जिससे वफ़ा की थी उम्मीद ग़ैर के साथ…
Read More » -
ख्वाबों की रानी
ख्वाबों की तुम हो मेरे दिल की पटरानी हकीकत की दुनियाँ में बन जा प्रेम कहानी मैं तुमसे अपनी…
Read More » -
भरोसेलाल का भरोसा–(हास्य-व्यंग्य)
मैं भरोसेलाल एक भरोसे का आदमी हूँ। कोई भी चिकनी चुपड़ी बातें की। उस पर सर्वत्र न्योछावर कर देने की…
Read More » -
संस्मरण मेरी साहित्यिक यात्रा – सुधीर श्रीवास्तव से यमराज मित्र तक
विद्यार्थी जीवन में अखबार पढ़ने की आदत और कहानियां, कविता के लेखकों की तरह अपना नाम देखने का लोभ मेरी…
Read More » -
मुझे अच्छे से याद है
कह के ख़ुशबू को, तेरी याद, बुलाई हमने,तंज सुनके भी, ना फ़रियाद, मुझे अच्छे से याद है। तूने चाहा था,…
Read More » -
होली-“ओज की होली — प्रेम की बोली”
रंगों से बढ़कर दिलों को, रंगने का संकल्प करो, होली आई है प्रेम से, जीवन को आलोकित करो। नफरत की…
Read More » -
फागुन का त्यौहार
फागुन का त्यौहार मनाये रंगों की सुन्दरता बरसाये मिष्ठानो का आनंद उठाए संग सुन्दर संदेश फैलाये अग्नि में प्रह्लाद ले…
Read More »