
मध्य प्रदेश आदिवासी पिछड़े अंचल झाबुआ में जन्म हुआ डॉ रामशंकर चंचल ने आज सम्पूर्ण देश और विश्व पटल पर दस्तक देती अपनी अद्भुत रचनाओं से हिन्दी भाषा को गौरव दिलाया है वहीं साहित्य जगत में नई कविता और लघु कथाओं को जीवंत रखें हजारों पाठकों को बांधे रखें अनेक युवाओं को प्रेरित करते हुए उन्हें साहित्य से जोड़ कर आज एक अच्छा मुकाम दिलाया है इस सत्य को स्वीकार करना होगा यही नहीं उनकी प्रथम रचनाएं भी प्रकाशन करवा उन्हें सम्मान और ऊर्जा प्रदान की है सचमुच वंदनीय है डॉ रामशंकर चंचल जिन्होंने सैकड़ों युवा पीढ़ी को प्रेरित करते हुए साहित्य से जोड़े रखा और जीवन को सार्थक करने के लिए प्रेरणा स्रोत बन गए आज सारे देश और विश्व में चर्चित साहित्य साधक डॉ रामशंकर चंचल जी के सैकड़ों सैकड़ों युवा पीढ़ी के कवि लेखक हैं जो सदियों उन्हें याद करते हुए सम्मान देते हुएं गर्व महसूस करते हुए अपने कर्म पथ पर साहित्य जगत में चर्चित हो चर्चा बन गए है 68 वर्षीय डॉ रामशंकर चंचल आज भी पूर्ण समर्पण ऊर्जा से साहित्य साधना और तपस्या करते हुए सारे देश और विश्व में लगे हुए हैं जिनकी सैकड़ों कृतियों में 17 कृति अमेज़न कृति है जो सदियों स्मरण रहेगी विश्व धरा पर दस्तक देती इंकलाब पब्लिकेशन मुंबई द्वारा प्रकाशित कृतियों में चर्चित हो गई है




