साहित्य

सावन का रहता इंतजार

डाॅ सुमन मेहरोत्रा

सावन का रहता इंतजार, हरियाली की बयार।

बारिश की बूंदें गिरें, धरती पर हरियाली धार।

 

सावन की बारिश में, नहाए धरती का अंग।

हरियाली की चादर ओढ़, धरती सजती रंग।

 

सावन का महीना, प्यार और प्रेम का संदेश।

बारिश की बूंदें गिरती,झूला झूले कजरी गायें।

 

सावन का रहता इंतजार,हरियाली तीज की धूम।

सदा सुहागन मनभावन,करती सोलह शृंगार।

 

सावन की सुंदरता, बाबा भोले की नगरिया।

बारिश की बूंदें गिरें, चलते रहते काॅवरिया।

 

सावन का महीना, पर्व त्योहार का समय।

हरियाली और खुशियों का संगम।

 

रक्षाबंधन की राखी, भाई-बहन का बंधन।

सावन की सुंदरता, पर्व त्योहार की बहार।

 

सावन की बारिश में, नाचते हैं मोर।

हरियाली की चादर ओढ़, धरती सजती है और।

 

सावन का रहता इंतजार, हरियाली की बयार।

सावन की बारिश में, धरती का सौंदर्य बढ़ता है।

 

स्वरचित

डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’

मुजफ्फरपुर,बिहार

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