साहित्य

मेरे तीनों,कान्हा मेरे पोतों

डॉ रामशंकर चंचल

मेरे तीनों,कान्हा
मेरे पोतों
मेरे कान्हा हो
जीवन को
कर्म पथ पर दस्तक दे
जीते जाने
और को पाठ पढ़ा
कुछ कर गुजरने जाना
व्यर्थ राग द्वेष , छल कपट जाति धर्म में उलझी
दुनिया
तुम सब को मानवीयता का
पाठ सीखना
खुद में जीती इस दुनिया को
और का दर्द पीड़ा का
अहसास करना
सर्व कल्याण सोच और चिंतन ले कर
सदा ही जीवन सार्थक कर जाना
अपने मानवीय जीवन को
व्यर्थ न कर
कुछ अच्छा दुनिया को
दे कर जाना
सदा ही इसी तरह
मस्त और प्रसन्न रह
ईश्वर साधना और तपस्या को
मान सम्मान दे
उसी खुश रखना
हर मानव मात्र पशु पक्षी में
विराजमान ईश्वर को सदा
आदर सहित
प्रणाम करना
बहुत बहुत है
मेरे कान्हा यह
जीवन को सुख सुकून के साथ व्यतीत करने को
बाकी सब ईश्वर पर छोड़े
सत् सत् प्रणाम
तुम्हारे भीतर विराजमान
ईश्वर को प्रणाम करता हूं
डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश

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