साहित्य

स्त्रग्विणी छंद श्याम भक्ति

डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण

श्याम की बॉंसुरी बोल सुन डोलना*।
*जोहते बाट राधा रहे झूलना*।।
*देख श्यामा रही अब कहाँ घोलना*।
*कृष्ण राधे बुलाते सभी बोलना*।

*जब रचाते महारास को संग में*।
*रात भर योग में भक्ति के ढंग में*।।
*साथ गोपाल है राधिका रंग में*।
*आ गए छोड़ सब खेलते चंग में*।

*जिन्दगी श्याम सौंपी तुम्हें आइए*।
*मन चुरा कर अभी श्याम मत जाइए*।।
*हम तुम्हारे रहे प्रीत तो कीजिए*।
*अब हमें आप दिल में बसा लीजिए*।।

*डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण*
*छतरपुर मध्यप्रदेश*

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