साहित्य

पति पत्नी का अटूट रिश्ता

सुषमा श्रीवास्तव

पति-पत्नी का अटूट रिश्ता समझदारी की गाँठ है।

जितनी मज़बूत बँधी हो उतनी दूर तक जाती है।

प्रेम के अथाह सागर में हिचकोले खाती चलती है,

सारी लहरों को काट-काट कर रस्ता पार कर जाती हैं।

पतवार की मूँठ पकड़ कर नैया पार हो जाती है।

रंग-बिरंगे सपने बुनते,कभी झूठ कभी सच्चे होते,

रिश्तों के खलिहानों में अपने भी तो बच्चे होते।

संस्कारों के बागीचे में, उत्तरदायित्वों का बोध होता,

धीरे-धीरे ,चलते-चलते , अंतिम पड़ाव का छोर होता,

पति-पत्नी का अटूट रिश्ता,इस हिस्से का छोर होता।

इस अटूटता की संपुष्टता ही, जीने का बलिष्ठ संबल बनता।।

सुषमा श्रीवास्तव, मौलिक सृजन ©®, रूद्रपुर, ऊधम सिंह नगर, उत्तराखंड।।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!