
जो कभी आसमां का राजा था,
पिंजरे मैं कैदी बनके कैसा कटा जीवन,
भूल गया वो खुली हबा मेँ उड़ना,
दाना पानी तो मिल जाता,
पर न मिल पाते उसके संगी साथी,
न खुली हबा न आसमां,
मत कैद करो इन परिंदो को,
उड़ने डॉ खुले आसमां मेँ
न ही छीनो इनसे इनकी आज़ादी,
आज़ादी ही इनका जीवन है,,,,
मुक्त करो इनको अपने पिंजरों से
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✍🏼पंकज एस पाण्डेय,
शिकोहाबाद !”




