साहित्य

पुष्पों की सुगंध

सुषमा श्रीवास्तव,

पुष्पों की सुगंध से सुरभित वन-बाग बगरियांँ,

खिल उठे आँगन-चौबारे, चारों देहरियाँ।

गमक उठे तन- मन सबका सजें,

सब शृंगार करें नारियाँ,

सद्विचारों से हो सुवासित सबरे गाँव औ नगरियाँ।

ऐसी फुहार हवा संग बरसे,

आय मिलो साँवरिया,

भक्ति भाव से भक्तिन जोहे तेरे चरण-कमलिया।।

 

सुषमा श्रीवास्तव, मौलिक सृजन, सद्यः निःसृत, रूद्रपुर, ऊधम सिंह नगर उत्तराखंड।।

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