
फिर से यह पैगाम लिखूं।
खुद को तेरे नाम लिखूं।
भोग वासना में लिपटे जो,
जीवन के अंजाम लिखूं।
सारे दुःख अपने हिस्से,
सुख के कई मुकाम लिखूं।
लड़कर जो उन तक पहुंचे,
उनका भी संग्राम लिखूं।
हो जाये दर्शन जिसमें,
विष वाला वह जाम लिखूं।
आये कथा -कहानी में जो,
कुछ उनके भी काम लिखूं।
लड़ना क्या लड़ते जाना ही,
जीवन में आराम लिखूं।
यात्रा है, आगे बढ़ना है,
थोड़ा -बहुत विराम लिखूं।
वाई.वेद प्रकाश
द्वारा विद्या रमण फाउंडेशन
शंकर नगर, मुराई बाग, डलमऊ, रायबरेली उत्तर प्रदेश 229207
9670040890




