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साहित्य
समयचक्र का फेर
दुख कहने से नीक है,उदय साधिये मौन। ढलते सूरज को भला,अर्घ्य चढ़ाता कौन।। अर्घ्य चढ़ाता कौन,समय है सब पर भारी।…
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साहित्य
सपने स्वेटर की तरह होतें हैं
वह एक ऊन का गोला है, अधूरी इच्छाओं का, जिसे समय की सिलाइयों पर हम रात-भर बुनते हैं। एक फंदा…
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साहित्य
जलधार की छाया
धधक रही भू की देहरी, रवि बरसाए अंगारे। ऐसे में तरु-छाया लगती, जैसे सुख के द्वारे।। पीपल की दृढ़…
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साहित्य
पति धर्म
कठिन धूप है,पांव जल रहे ,कैसे पति को गंगा नहलाऊं, जिद है जाएंगे पैदल ही,मां कैसे तुमको ला पाऊं,…
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साहित्य
गुरु वंदना
मेरी कुटिया में गुरु जी आज आयेंगे, मेरे सोए हुए भाग्य भी जग जायेंगे। धूल भरे आँगन में दीपक…
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साहित्य
तप्त समय का सत्य
जलते सूरज की चिंगारी अब केवल मौसम में नहीं है, मनुष्य के भीतर फैली अतृप्त इच्छाओं की गर्मी है। …
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साहित्य
समय सबसे बलवान् है
वक्त की धूप – छांव की तरह, रंग हमारे भी बदलते हैं। हालात की हवाओं क़े संग रिश्तों के अर्थ…
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साहित्य
एक-न-एक दिन
*क्षणिकाएंँ* हबस के पुजारी फेंकते हैं प्रेमजाल का पासा करते हैं निरंतर प्रयास यही सोचकर कि एक-न-एक दिन तो पूरण…
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साहित्य
सुंदरता की तारीफ
एक सहेली ने अपनी सहेली की सुंदरता की तारीफ की तो वह खुद अपनी सुंदरता की बगीचा ही लगा दिया।…
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सुंदरता की तारीफ
सुंदरता की तारीफ (हास्य-व्यंग्य) ——— एक सहेली ने अपनी सहेली की सुंदरता की तारीफ की तो वह खुद अपनी सुंदरता…
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