साहित्य

  • प्रेम महिमा

    प्रेम गली अति पावन जानो, इसे सत्य की मूरत मानो। हृदय बीच हो इसका वासा, मिट जाए सारी दुराशा। बिना…

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  • जीवन मरण का खेल है जीवन

    जीवन मरण का खेल है जीवन, आना-जाना मेला है, आज खिला जो फूल यहाँ, कल उसका ही झमेला है। हँसते-हँसते…

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  • गई भैंस पानी में – लोकोक्ति

    दादा जी ऐसा क्यों कहते, गई भैंस पानी में, जानबूझकर इसको कहते या फिर नादानी में। दादा बोले किसी काम…

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  • दिव्य प्रेमात्मा

    ब्रज के कण-कण में रचा,बसा मधुर सलोना संसार। राधे-मोहन पुण्य प्रेमात्मा द्वय,के एक दूजे से प्यार।। पावन ब्रज की मोहिनी…

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  • प्रेम

    अनुपम लीला प्रभु की न्यारी। प्रेम भक्ति है सबसे प्यारी।। इसके बस में दुनिया सारी। महक उठे उर की फुलवारी।।…

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  • बसंत

    कल मौसम फिर करवट बदलेगा, सूर्य ऊष्मा धरती पर फैलाएगा। सरसों कुसुमित हो हँसी बिखेरेगी, खेत-खलिहान में बसंत झूमेगा गाएगा।…

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  • होली गीत

    गिरा दो नफ़रत की दीवारें,अब फैलाओ प्यार आया होली का त्यौहार…. हवा बसन्ती बहने लगी है कानों में यह कहने…

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  • अपठित उपदेश‌

    किसे सुनायें, कौन सुनेगा,गूँगों की इस बस्ती में। देते हैं पतवार को गाली,छेद हुआ जब कश्ती में।। बंधुत्व मैत्रीभाव जहाँ…

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  • मेरे तीनों,कान्हा मेरे पोतों

    मेरे तीनों,कान्हा मेरे पोतों मेरे कान्हा हो जीवन को कर्म पथ पर दस्तक दे जीते जाने और को पाठ पढ़ा…

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  • बुझा दो शमां

    बुझा दो शमां वो आए हम लाजवाब हो गए महफिल में मेरी रौनक ए महताब हो गए रूह में उतर…

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