साहित्य
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हे हंस वाहिनी मां
हे हंस वाहिनी मां, हृदय में प्रेम भर दो ’ जीवन अब हम सब का, मेरी मातअमर कर दो। …
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चौथा पं. सीताराम त्रिपाठी भक्ति काव्य सम्मान
इन्दौर – साहित्य की गौरवशाली परंपरा की एक और कड़ी में गत दिवस मध्य भारत हिन्दी साहित्य समिति में ख्यात…
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रे पंक्षी उन्मुक्त गगन के
रे पंक्षी तुँ उन्मुक्त नील गगन के विचरण करती हो साथ पवन के चोंच से चुग कर …
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फागुन
एक यह फागुन है किसके संग खेलूं मैं होली, रंग हुये सारे बेरंग, जिंदगी के , जल गये थे सारे…
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बाल कहानी- होली है
चीकू खरगोश अपनी माँद में से निकलने को ही तैयार नहीं था। उसने बीती रात को ही आठ-दस गाज़रें अपनी…
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बचपन की टोली
आज़ाद परिंदे थे हम सब, नीला गगन मुट्ठी में भर लेते थे। सपनों की कोई सरहद न थी, पाँवों में…
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होली की हुड़दंग
गली – गली हुड़दंग मचा है। रंग बिना अब कौन बचा है।। शोर करे बच्चे अब सारे। भर पिचकारी सब…
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तमन्ना
अब और नहीं जीने की तमन्ना ही नहीं किसको दे हम दोष अपनी नाकामी का, कोई हम ख़्याल हमको मिला…
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हरी-हरी नोटों का चमत्कार–हास्य-व्यंग्य
मैं मिश्रीलाल लिखने वाला घूस तो दे नहीं सकता। हाथ जोड़ विनती कर सकता हूँ। मैं विनम्रता पूर्वक एक अधिकारी…
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एक दिन कहानी बन कर चले जाओगे
** एक दिन कहानी बन कर चले जाओगे। लिखोगे अच्छी तो सबको ही याद आओगे।। ** दिल में जगह बना…
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