साहित्य

  • आशा की किरण

    आशा की वो प्रथम किरण -जो कल भी जली थी आज भी जली है…, और -कल भी जलेगी…! लेकर आने…

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  • आओ वृक्षारोपण करके

    तपती धरती आज बिलखती, कैसे हम मुस्काऍं। आओ वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचाऍं।। हरियाली का गहना देकर, कोना सभी सजाना। रोपण…

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  • मन मिल जाए भोले में

    ये तन मिट्टी का है भोले, आकर बस जाओ तुम भोले, रीत अनोखी होगी भोले, प्रीत में बंध जाओ तुम…

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  • अकेलापन

    अकेलापन की त्रासदी से अनजान लोगों के लिए अकेलापन एक ऐसी त्रासदी है जो ईश्वर किसी को न दे अक्सर…

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  • अकेलापन

    अच्छा लगता है, महीने के अंतिम दिनों में अकेले बैठकर, अपने बीते हुए पलों को याद करना … कभी-कभी बीते…

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  • लघुकथा- अक्षय मोती

    ” माँ! मैं बर्बाद हो गई। सब खत्म हो गया माँ!” तीन दिन से अस्पताल में बेहोश पड़ी आरती को…

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  • संघर्ष और श्रम

    प्रातः काल जब हम उड़ते हैं। नई उम्मीद नई सोच नई ऊर्जा के साथ। अपने खून पसीने से सींचते हैं।…

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  • दीदार

    साहिल की रेत पे बैठा हूँ मैं अकेला करता हूँ तेरी बेसब्री से     इन्तजार हल्की धुंधली कुहासा उतर   …

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  • गौरैया

      घर-आँगन,चौबारे बगिया, ढूँढ रही आज छाँव गौरैया। दानापानी का सकोरा देखे, पंख पसारे नीचे को आए। दाना चुगती, पानी…

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  • जयहिन्द कर्नल साहब

    मन के हारे हार है, मन के जीते जीत, कहे कबीर हरि पाइए, मन ही की परतीत। जब एक चिकित्सक…

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