साहित्य
-
ग़ज़ल
आदमी को आदमी के काम आना चाहिए। फर्ज कुछ इंसानियत का भी निभाना चाहिए। नफरतों की बह रही जालिम हवा…
Read More » -
मुस्कान के श्रृंगार का कोई नहीं मोल होता है
** मुस्कान के श्रृंगार का कोई नहीं मोल होता है। रिश्तों में मुस्कान का कोई और नहीं तोल होता है।…
Read More » -
काँवर भर गंगा जल लाते
गीत- काँवर भर गंगा जल लाते काँवर भर गंगा जल लाते, बम-बम बोलते। मधुर भजन कानों में शिव के, मिश्री…
Read More » -
ऋतु वसंती (गीत)
शाख नव पल्लव लिए है, बह रही मृदु वात है। ऋतु वसंती छा गई फिर, नव मिली सौगात है।। अब…
Read More » -
हवा
बह चली वो हवा, वह चली वो हवा। तूने देखी नहीं, मैंने देखी नहीं, भूत है क्या कोई, या हौआ…
Read More » -
एक पैर से जाप करूंँगी
एक पैर से जाप करूंँगी, करूंँ तपस्या घोर । उमा कहे प्रभु हे शिव शंकर, थामो जीवन डोर ।। मान…
Read More » -
बार बार
एक इल्तज़ा तुझे मैं बार बार करता हूं है मोहब्बत तुझसे मैं ऐलान करता हूं ना बन इतना बेरहम ए…
Read More » -
जन्म जन्म का साथ
सुख-दु:ख के दो रंगों के संग, बहती रहती जीवन की धारा। साथ- साथ चलते हुए गाते, जनम जनम का साथ…
Read More » -
पूर्णिका
परिवर्तित आना, स्थानीय बदला है प्रारम्भिक नेह जिन्दगी पहले ही बदली थी घराना बदला है। है हकीकत की कहानी,…
Read More » -
गीत
माँ गौरा के दरवाजे पर आज बजी शहनाई है। बारात सजी भोले वर संग मैना के घर आई है।। हिमगिरि…
Read More »