साहित्य
-
प्रेम में तेरे
प्रेम में तेरे, खुदको बांध बैठी हूँ। प्रेम में तेरे, खुदको सजाए बैठी हूँ। तू नाराज़ होता, तो में बेचैन…
Read More » -
गजल
मधुर प्रेम धाम की वाटिका ,देखेंगे वृंदावन में, यमुना जल में गोता पावन, जाएंगे वृंदावन में। कान्हा जी के चरणों…
Read More » -
जागृति
शहर की भागती सड़कों पर ठहरी सी है एक पुकार, भीड़ में खोता इंसान, ढूँढ़े अपना ही आकार। मोबाइल की…
Read More » -
भोजपुरी शब्दानुशासन के रचयिता : डॉ रसिक बिहारी ओझा ‘निर्भीक’
जन्मतिथि- 21 मई 1932 पुण्यतिथि – 8 अप्रैल 2011 भोजपुरी में पहिला व्यवहारिक व्याकरण, बाल एकांकी संग्रह, छाया नाटक, रेखाचित्र…
Read More » -
पूर्वांचल में गंगा सेवा को नई दिशा: वरिष्ठ साहित्यकार मुक्तिनाथ त्रिपाठी बने संयोजक
गोरखपुर। माँ गंगा की निर्मल धारा एवं सनातन संस्कृति के संरक्षण हेतु समर्पित अखिल भारतीय संगठन दिव्य गंगा सेवा मिशन…
Read More » -
निर्विन्ध्या
निर्विन्ध्या है विंध्य पर्वत की, एक प्रमुख सरिता। हमारी निर्विन्ध्या भी है, एक गुणी ललिता। निर्विन्ध्या थी शिक्षिका, आपने जलाई…
Read More » -
संगिनी
जब तूं मेरे साथ आ जाती है मेरी चाल बदल जाती है मै धीरे-धीरे आगे बढ़ता रहता हूं मंजिल को…
Read More » -
कुंडलिया
मना आपका हम रहे ,जन्मदिवस हनुमान दे देकर शुभकामना ,खूब करें गुणगान। खूब करें गुणगान, राम के तुम हो प्यारे…
Read More » -
अंजनी पुत्र हनुमान
हे महावीर! हे बजरंगबली आप अद्भुत पराक्रमी बुद्धि – ज्ञान के सागर , आप ही तो है सगुनी- अनुपमी। हनुमान…
Read More » -
उछलते -छिटकते मुद्दे ( हास्य व्यंग्य )
और फिर एक बार विक्रम बेताल की ओर बढ़ा। उसे पेड़ से उतारा, कंधे पर डाला और चल दिया गंतव्य की…
Read More »