साहित्य
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पेड़ पौधे हमारी धरोहर हैं
ये कटते हुए पेड़ पौधे ये सूखती नदियां सरोवर ये पर्वत सिमटते हुए एक रोज़ यूं ही ख़त्म होते चले…
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परंपरा व आस्था पर प्रहार
परंपरा व आस्था पर प्रहार, सरेआम आधुनिक भारत में, अपने ही लोगों के द्वारा देखा, वो रौंद गये एक लक्ष्मण…
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पीली चूनर
हरितिमा की चादर ओढ़ वसुधा इतराती है। रंग-बिरंगे फूल खिलें जो, बगिया महकाती है। गेहूँ के खेतों में फूली सरसों…
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पुस्तकें
पुस्तकें , ये केवल ढेरों पन्नों का ढेर नहीं हैं, ये मन की बुझी लौ को रोशन करती हैं। अक्षरों…
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पढ़ा-लिखा गंवार (व्यंग्यात्मक कविता)
एक सज्जन मिले पढ़े-लिखे लग रहे थे चमचमाती कार बीच सड़क पर रोक दी आवागमन बाधित न हो बोल पड़ा-…
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पूर्वी – पलनिया में
पूर्वी – पलनिया में दिनवा बीतावत बानी राजा जी पलनिया में, फागुन बीतल जाता, आइब चइती कटनिया में,,,,। अंँखिया में…
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प्रभु आन बसो मन मंदिर में
(दुर्मिल सवैया छंद) प्रभु आन बसो मन मंदिर में दिन रात जपें रचते रचना। तुम मातु पिता धनदा विमला सुन…
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फागुन की गूंज
फागुन आया है प्रियतम, सरसों ने ओढ़ा कंचन रंग, धरती के अधरों पर सज उठा नव यौवन का ढंग। मंद…
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