साहित्य
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वृक्ष की पुकार
शुष्क हुआ मैं, देह हुई है जर्जर, हे मानव! यह क्या किया तूने बन दानव? कभी पल्लव, पुष्प, फलों से…
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धरा की पुकार (गीत)
पुकारती हमें धरा। रखें मुझे हरा-हरा।। सदैव पेड़ ही लगा। भूचाल खास ये भगा। तलाब को न पाटिए। न पेड़…
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परोपकार
जगत में ईश्वर सर्व व्याप्त होता नित हम सब पर दया दिखाता प्रभू से मिला शक्ति निर्मल होता ईश्वर से…
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बहती जलधारा
कुछ कहती है यह बहती जलधारा, जीवन में ऊर्जा का संचार करती है। कल-कल करती बहती जलधारा, जीवन का नाद…
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इयरवा जहरवा खइले बा
बड़ी तबाही के बात एह गर्मी में चल रहल बा।आ तबाही के बात ई बा कि लोग अपना उमगल मन…
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सिसकती सिहरती धरा
सिसकती सिहरती धरा, सिमटती सकुचाती धरा I जाने कौन इसके अस्तित्व से खिलवाड़ कर रहा ? विकास के नाम सभी…
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अब काहें पछताएं, जब चिड़िया चुग गई खेत
लेना हुआ स्वास है मुश्किल, अब समझ नहीं आ रहा कैसे करें चिल।। हवाएं दूषित , पानी प्रदूषित।। केमिकल ने…
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विश्व पृथ्वी दिवस : बटोही
बटोही भूल गया तू गाँव जगह-जगह पंछियों के मेले,लगते थे उस ठाँँव बटोही…… गाँव में चौपालें सजती थीं पनघट पै…
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पर्यावरण-संरक्षण
चप्पा-चप्पा इस धरती में, मिलकर पेड़ उगाये। आओ! वृक्षारोपण करके, पर्यावरण बचायें।। पर्यावरण हुआ संदूषित, पवन हुई जहरीली। कथित प्रगति…
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प्यारी धरती माँ
आइए एक वृक्ष लगाएं पर्यावरण को स्वच्छ बनाएं। मिलकर पेड़ लगाएं हम धरती का ताप करें कम। हरियाली होगी चहुंओर…
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