
दोस्ती एक एहसास है ,
एक वरदान है ,
एक ख्वाइश है ,
एक सिख है ,
सही गलत की पहचान है
जीवन भर का साथ है ,
ना प्रेम के साथी है,
पर कही भूले भटके दो यात्री है,
साथ में बढ़ना पहचान है,
एक गलत तो दूसरे को सुधारे ये सलाह है।
ना कोई धर्म , ना कोई जात ,
ना कोई दबाव, ना कोई व्यवहार।
बस व्यवस्था है
एक साथी की एक साथी को ,
सुंदर सा रिश्ता है ।
ना कोई उम्मीद ना कोई आशा ,
बस साथ निभाना है
जब तक है इस प्राण में स्वास ।
ये भी जरूरी नहीं कि साथ जन्मों का हो तो ही दोस्ती है।
कुछ दोस्त होते ही कुछ समय के लिए पर ,
यादें दे जाते है सैकड़ों सालों की।
एहसास से स्वास लेने पर समझ आएगी ,
ये दोस्ती है,
पवित्र , निष्कपट, सहृदय,
अब सबको अपना बनाएगी।।
रिया राणावत
कालीदेवी,झाबुआ(मध्यप्रदेश)




