साहित्य

दोस्ती

रिया राणावत 

दोस्ती एक एहसास है ,

एक वरदान है ,

एक ख्वाइश है ,

एक सिख है ,

सही गलत की पहचान है

जीवन भर का साथ है ,

ना प्रेम के साथी है,

पर कही भूले भटके दो यात्री है,

साथ में बढ़ना पहचान है,

एक गलत तो दूसरे को सुधारे ये सलाह है।

ना कोई धर्म , ना कोई जात ,

ना कोई दबाव, ना कोई व्यवहार।

बस व्यवस्था है

एक साथी की एक साथी को ,

सुंदर सा रिश्ता है ।

ना कोई उम्मीद ना कोई आशा ,

बस साथ निभाना है

जब तक है इस प्राण में स्वास ।

ये भी जरूरी नहीं कि साथ जन्मों का हो तो ही दोस्ती है।

कुछ दोस्त होते ही कुछ समय के लिए पर ,

यादें दे जाते है सैकड़ों सालों की।

एहसास से स्वास लेने पर समझ आएगी ,

ये दोस्ती है,

पवित्र , निष्कपट, सहृदय,

अब सबको अपना बनाएगी।।

 

रिया राणावत

कालीदेवी,झाबुआ(मध्यप्रदेश)

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