साहित्य

पृथ्वी दिवस

रिया राणावत

निर्मल है वृक्ष यहां पर ,
हैं हरियाली सी सज्जा यहां पर।
पृथ्वी है गोल हमारी ,
ना त्रिकोण , ना चौकोर ।।

अलग अलग यहां फुल है खिलते ,
अलग अलग यहां पंछी उड़ते।
सुंदर है बड़ी पृथ्वी हमारी ,
हर ग्रह में पहले जानी जाती ।।

पृथ्वी हमारी पालन हार,
सबको दे भर कर भंडार ।
सुन्दर सी ओड कर ओढ़नी,
पृथ्वी दिखती निराली ।।

आओ सब गाओ,
पृथ्वी को बचाओ ।
पेड़ पौध लगाओ ,
गंदगी से बचाओ ।।

सुख रह है पानी इसका ,
रो रही है ये भी डर से ।
जन जीवन का भार उठाती,
सबके ये प्राण बचाती ।।

पृथ्वी ऐसा स्थल हैं,
जग सब संयम हैं।
सोचो तो समझ आए ,
अपनी पृथ्वी कैसे बचाए ।।

निर्मल है वृक्ष यहां पर ,
हैं हरियाली सी सज्जा यहां पर।
पृथ्वी है गोल हमारी ,
ना त्रिकोण , ना चौकोर ।।

– रिया राणावत
कालीदेवी,झाबुआ(मध्यप्रदेश)

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