साहित्य

श्रमिक ईश्वर प्रतिरूप

डाॅ सुमन मेहरोत्रा'सुरभि'

श्रम पूजा है, श्रम ईश्वर का रूप,
कर्म विधान में श्रमिक ईश्वर प्रतिरूप।

मजदूर हैं मजबूर नहीं, वे श्रमजीवी,
विश्वकर्मा के प्रतीक, नहीं परजीवी।

पत्थर फोड़ें, नहर खोदें, खोदें खदान,
गगनचुंबी इमारतों से करते विश्व का आह्वान।

श्रम की पूँजी उन्हें मिली, श्रेष्ठ वरदान,
मजदूर हैं मजबूर नहीं, वे श्रमिक महान।

कर्म से ही होता जीवन का अस्तित्व,
श्रम का ईश्वरीय रूप है पूज्य अनादि सत्य।

लोहे के सोए असुर को श्रमिक जगाता,
रक्तरंजित धरा पर शांति पथ बनाता।

आज श्रमिक दिवस पर करते उनका वंदन,
मिल जाए उन्हें श्रम का उचित मूल्यांकन।

ये धरा के अनमोल आधार-स्तंभ,
इनसे ही हर पथ पाता है नव आयाम।

मेहनत की रेखाओं में लिखा भाग्य विधान,
श्रम से ही सजे जीवन का हर एक स्थान।

पसीने की बूंदों में बसती है पहचान,
मजदूर ही गढ़ते हैं भविष्य का सम्मान।

डाॅ सुमन मेहरोत्रा’सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार

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