साहित्य

मुक्तामणि छंद

राम किशोर वर्मा

(शादी के बाद अबैध संबंध अपराध नहीं -सुप्रीम कोर्ट)

बदल गई व्यभिचार की, यह कैसी परिभाषा ।

वैवाहिक संबंध में, होगी घोर निराशा ।।१।।

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वैवाहिक संबंध में, घोला जहर निराला ।

इससे तो अच्छा यही, भँवरा बन रह लाला ।।२।।

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आजादी के नाम पर, मत करिए बर्बादी ।

टूटेंगी जब मान्यता, कौन करेगा शादी ।।३।।

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ऐसे सब कानून पर, संसद ध्यान लगाए ।

भारत के भूगोल से, तुरंत इसे हटाए ।।४।।

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वैवाहिक जन पर नहीं, अन्य यौन पर रोका ।

बच सकता परिवार क्या, कोई करे न टोका ।।५।।

*-राम किशोर वर्मा*

जयपुर (राजस्थान)

दिनांक:- ०४-०६-२०२६ गुरुवार

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