-
साहित्य
आंतरिक संप्रभुता का अमोघ अस्त्र, विकारों के कोलाहल में शांत रहने की कला
आज का मानव विकास और तकनीक के शिख़र पर बैठकर भी भीतर से अत्यंत अशांत और बेचैन है। हम एक…
Read More » -
साहित्य
विकसित भारत के निर्माण में हमारी भूमिका क्या हो,
किसी भी राष्ट्र की नियति केवल उसकी सीमाओं या सरकारी नीतियों से तय नहीं होती, बल्कि उसके नागरिकों के सामूहिक…
Read More » -
साहित्य
बहू मारते धन के लोभी
किरण कुमारी ‘वर्तनी’ जमशेदपुर बहु मारते धन के लोभी, विस्मय वाली बात। कड़ा कानून आज बने बस,हो निर्णय रातों…
Read More » -
साहित्य
हिंदी पत्रकारिता दिवस 30 मई।।
1 कभी बोल मीठे तो कभी चीत्कार लिखता है। कभी विपक्ष तो कभी सरकार लिखता है।। यह कलम का सिपाही…
Read More » -
साहित्य
घन बरसे चहू ओर
सहसा बादल छा जाता है नभ काले काले बनता है इससे मेघ गर्जन करता है और बिजली चमकती है मूसलधार…
Read More » -
साहित्य
शिक्षा में त्रिभाषा सूत्र और राष्ट्रीय एकता
भाषा किसी भी राष्ट्र की एकता की सूत्रधार और पराधीन होने पर भी कारागार की कुंजी होती है।कदाचित भाषा ही…
Read More » -
साहित्य
सीबीएसई का मूल्यांकन घोटाला और नकारे प्रधान
भारत की शिक्षा व्यवस्था में सीबीएसई को सबसे प्रतिष्ठित बोर्डों में एक गिना जाता है। हर वर्ष लाखों विद्यार्थी इसकी…
Read More » -
साहित्य
हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्ष
#दो सौ वर्षों की गौरव गाथा का हिंदी ने एक नया इतिहास लिखा, जन-जन की आवाज़ बनकर सच का सुंदर…
Read More » -
साहित्य
नौतपा का ताप
प्रकृति का नियम है, नौतपा का यह काल, सूरज बरसाए अग्नि-किरणें, बढ़े तपन की आग। रोहिणी में जब सूर्य पधारें,…
Read More » -
साहित्य
प्रेम
छल से काम न चलता है प्रेम न बल से डिगता है डरा-डरा निश्चर दल हारा हार गया लंकेश भी…
Read More »