साहित्य
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सम सामयिक
बने मासूम वो चेहरा ढक निकलते हैं। बेरहम वार वही हमपे किया करते हैं।। क्यूं बने दोस्त तेरे हम,दिल के…
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अर्चना सिंह का शोध पत्र पुस्तक रूप में “नारी समस्या सशक्तिकरण और मानवता” का हुआ विमोचन
महराजगंज।जवाहरलाल नेहरू स्मारक पी जी कॉलेज में हिंदी विभाग, हिंदुस्तान अकादमी, अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान लखनऊ एवं सिटीजन फोरम के…
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जीवन का अवनमन -उन्नयन
धारा के विपरीत नाव का,वेग निकाला करते थे। सापेक्ष गति निरपेक्ष मान,गुरुवृन्द पढ़ाया करते थे।। जाने कितने प्रश्न हल किये,ज्यामिति…
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किसान का गौरव, पांच सौ का सिक्का
माटी का पुत्र किसान यहाँ, श्रम से धरती सजाता है, सूखी डाली में भी अपने सपनों का फूल खिलाता है।…
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इतनी सी है चाह मेरी
अब जीना चाहती हूँ उड़ना चाहती हूँ आगे बढ़ सबको दिखाना चाहती हूँ की लड़की हूँ, पर कमज़ोर नहीं… की…
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ये जमाना बेकार हो गया
ये जमाना भी बेकार हो गया वक्त की रफ़्तार से टकरार हो गया, दिलों की बातें अब कम हो गईं,…
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वह मानव
जीवन मृत्यु और मोक्ष के बीच उलझे हुए मानव मन की व्यथा को व्यक्त करती हुई रचना वह मानव ही…
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देख के बॉलिवुड की फिल्में
देख के बॉलिवुड की फिल्में, आज यार सब हिल जायेंगे। कपड़ो में से जिस्म झाँकता, किसिंग सीन भी मिल जायेंगे।।…
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वक़्त आ गया दिल से दिल को मिलाया जाये
1 बुझ गये दीए फिर से उन्हें जलाया जाये। गुम गये रिश्ते हालात में उन्हें बुलाया जाये।। बहुत हो गया…
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नारी: समाज की रीढ़
वह केवल परिवार की धुरी नहीं, बल्कि समाज में बदलाव की भी गूंज है। हर चुनौती में वह साहस दिखाती,…
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