साहित्य
-
कविता
हरा भरा धरती का आंचल, मिलकर इसे सजाओ तो, नदियों की बहती धारा में, कुछ प्यार का अमृत लाओ तो।…
Read More » -
साफ सुथरी भोजपुरी रील क्रिएटर हैं
सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर अल्का सिंह आज किसी पहचान की मोहताज़ नही हैं , इन्होंने बहुत कम समय मे ही सोशल…
Read More » -
पर्यावरण संरक्षण
परकरती प्रकृति निश्छल प्रेम अपार पेड़ पौधे पशु पक्षी इसका श्रृंगार करें हम भी इनका संरक्षण जिससे महके हमारा यह…
Read More » -
कुछ दोहा मुक्तक
पर्यावरण दिवस की हार्दिक शुभकजीवन दुष्कर क्यों हुआ, प्रकृति हुई लाचार। इस पर मिलकर कीजिए, सब जन सोच विचार। भूल…
Read More » -
-
मायके की पुकार
मायके की पुकार माया बालकनी में खड़ी आसमान को देख रही थी। आंखों में आंसू थे और चेहरे पर उदासी…
Read More » -
समाज की नजर
“समाज की नजर” बारिश के बाद की शाम थी। गली के नुक्कड़ पर चार लोग हमेशा की तरह प्लास्टिक की…
Read More » -
देखो न तुम्हारी इस अद्भुत छवि ने
देख रही हो न किस कदर कलम दौड़ रही है सुखद अहसास लिए जैसे तुम आ गई और बस अब…
Read More » -
बहुत देर तक
बाते करता रहा तुम्हारी तरह है यह अपनी भीड़ से अलग एकदम सहज सरल छवि तेज धूप, आंधी तूफान सब…
Read More » -
बरस रहे नभ से अंगारे
तप्त हुआ दिनकर अतिशय अब, जीव-जन्तु लाचार। बरस रहे नभ से अंगारे, चहुँदिश हाहाकार।। ज्येष्ठ मास की तप्त दुपहरी,…
Read More »