साहित्य
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नारी जीवन
नारी जीवन की व्यथा कथा सुन, क्या कर पाओगे इसमें, देख घिनौना दृश्य सड़क पर कुछ भी कर पाओगे इसमें?…
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आओ खेलें होली
रंग खेलें ले अबीर गुलाल,गुझिया की अनुपम होली। आएँ खेलें हम सब मिल के,प्रेम से अपनी ये होली।। डालें रंग…
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जो बीत गया वह भी क्या ज़माना था
** जो बीत गया वह भी क्या ज़माना था। नहीं कोई एक दूजे से अनजाना था।। ** नमस्कार दुआ सलाम…
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मोहब्बत-भरी तकरार की
मेरी खबर तुम भी रखते हो मुझसे मोहब्बत करते हो दूसरी पर नजर रखते हो फिर कहते हो बस तुमसे…
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आभार संदेश
आदरणीय डॉ. शिवेश्वर दत्त पाण्डेय जी, समूह संपादक, दि ग्राम टुडे सादर प्रणाम। फायकू होली विशेषांक में मेरी रचना को…
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बासंती मन
मुरझायी दिगंबर शाखों पर खेतों और खलिहानों में नव पल्लव, नव पुष्पों को पल्लवित कर महका जाना हे बसंत !…
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इतिहास
जीवन के इस काल खंड में मैंने…, आज के दिन इस देश में.., इतिहास को बनते देखा, एक बार नहीं-दो…
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रंग गया मुझको वह रंग रसिया
फागुन का मधुमास जो आया, होली का उत्सव संग लाया, होल्यारों की मस्त टोलियां, घूमें घर-घर गली नगरिया। पनघट से…
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कलरव गान करें खग कुल गण
मधुमास वसंत पुन: आने वाला है, बीता शीत वसन्त जागने वाला है, आम्रवृक्ष पर बौर प्रफुल्लित होंगे, कुसुमित महुआ पेड़ों…
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समीक्षा-लेख दि ग्राम टुडे – फायकू होली विशेषांक (मार्च 2026)
“रंगों के इस उत्सव में जब शब्द भी अबीर-गुलाल बन जाएँ, तब साहित्य अपना वास्तविक उत्सव मनाता है।” दि ग्राम…
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