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साहित्य
सच्चे संस्कार
चंद लोग कहते हैं, “परंपरा की चौखट से बाहर मत जाना, यही मर्यादा है, यही धर्म निभाना।” मैंने देखा, मर्यादा…
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गाँव का सुकून
शहर की सड़कों पर धूप अंगारे बरसाती है, सीमेंट की दीवारों में हर साँस घबराती है। कटते पेड़ों की चीखें…
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कुछ रिश्ते आवाज नहीं करते
कुछ रिश्ते आवाज़ नहीं करते फिर भी उम्र भर सुनाई देते हैं। कुछ रिश्ते धूप की तरह, चुपचाप आँगन में…
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चलें गाँव की ओर
आई गर्मी,विकट दुपहरी,नौतपा जेठ में ढाए कहर, थोड़ी सी राहत पाने चलें गाँव की ओर। अपनत्व का भाव देखने चलें…
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न्यूज़ वालों का कमाल
.ये न्यूज़ वाले भी यारो, बड़े निराले होते हैं, छोटी-सी बात को लेकर, किस्से मतवाले होते हैं। कहीं बिल्ली छत…
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किसी का दिन किसी का दिल बदलता है
दिन निकलता था हँसी होंठों पर थी, बचकाना बचपना था पूरी मस्ती थी, जैसे जैसे समझदार होते गये हम, बिना…
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अलविदा बशीर बद्र साहब
अलविदा बशीर बद्र साहब, अदब का एक चिराग बुझ गया, ग़ज़लों की महफ़िल में जैसे सन्नाटा सा छा गया। आपकी…
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अकेलापन
मेरे अकेलेपन से जो निकले मेरी कलम से अल्फाज वो,जैसे दिलों मे जगा दे आगाज़, हर शब्द में बसी है…
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धुएँ का ये काला घेरा
जहरीली सांसों से भरा पर्यावरण फैला हर ओर है नीला नहीं ये मट मैला आकाश कालिख में लिपटा है मशीनों…
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अनमोल उपहार सा जीवन मत उपहास बनाना
अनमोल उपहार सा जीवन मत उपहास बनाना। सबको मिलता आम जीवन तुमको है खास बनाना।। अपना कर्म निभाते चलो फल…
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