साहित्य
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लघुकथा “सेवानिवृत्त वरिष्ठ जन”
सोमेश आज सर्वोच्च अधिकारी के पद पर प्रमोशन पाकर अत्यंत प्रसन्न था…. अपनी सफलता का श्रेय उसने अपने परिवारजनों, बुजुर्गों…
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डॉ रामशंकर चंचल
अक्सर खुब सुरत लोग उह भ्रम में रहते हैं कि वो खूब सूरत है जबकि कोइ भी व्यक्ति हो वह…
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गज़ल
तुम्हारी बिन इजाजत प्यार को स्वीकार करता क्या। तुम्हें अपना बनाने के लिए इकरार करता क्या।। बनाई है धरा अंबर…
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न घर का रहा न घाट का—हास्य-व्यंग्य
एक साहित्यिक संस्था के मेरे परिचित एडमिन जी हैं। बहुत उदार ह्रदय। करूणा का सागर छलकता है। जो उनसे मिल…
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जीने की सीख
रात तनहाई ने फिर जगा दिया ख़्वाब बनकर कोई खिड़की से आ गया!! सोचा फिर कौन मेरा अपना है अलावा…
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सूरज
सात घोड़ों का है रथ तुम्हारा जग की आत्मा,तुम्हें पुकारा नवग्रह राजा का, पद प्राप्त सूरज सम्पूर्ण जग में व्याप्त…
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भोले आ गए रे …..
भोले तो आंगन में आ गए रे, आकर सभी को बुला रहे रे, भोले तो आंगन में आ गए रे……
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कविता
फागुन आयो री सखी मौसम ने ली अंगड़ाई सखी फागुन आयो री बृज की गली गली होली के रंग में…
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फागुन की मस्ती
झूमता आया फागुन की मस्ती बहारों की रानी की है ये बस्ती पूरवाई ने ली है आज अंगड़ाई महुवा फूल…
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शैतान का कोई दीन ए इमान नहीं होता
शैतान का कोई दीन ए इमान नहीं होता होता अगर तो वह शैतान नहीं होता उसके चेले रोज मनाते है…
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